आत्मगौरव को नष्ट करके जीना मर्त्यु से भी बुरा है अगर व्यक्ति ने अपने प्रति सम्मान ना हो ,आत्मगौरव न हो तो उसको कहीं भी शांति नहीं मिल सकती। आत्मगौरव मन का उत्साह है, आंतरिक शक्ति है जो व्यक्ति को पक, पक पर सहयोग करती है। अगर यह आत्म गौरव व्यक्ति से छीन लिया जाए तो उसका जीवन पथ पर उत्साह ,जोश के साथ चलना मुश्किल है। । व्यक्ति का आत्म गौरव उन कार्यों से मरता है जो गलत श्रेणी में आते हैं और जीसे करने से आत्मा मना करती है। अगर व्यक्ति वही कार्य करता है जिस कार्य के लिए उसकी आत्मा गवा नहीं देती तो एक आत्मग्लारनि महसूस होती है। अगर व्यक्ति द्वारा आत्मा के मना बोलने के बाद भी स्वार्थवश कोई काम करता है तो उसका आत्मसम्मान कम हो जाता हैं। आत्मसम्मान मतलब अपने सव्य के प्रति सम्मान। हर व्यक्ति यही चाहता है कि सभी लोग उसका सम्मान करें ,उसके कार्य की प्रसन्नसा करे मगर यह...
मन के विभिन्न पहलू , मन के विकास से कैसे अपनी उन्नति करे l सुख - दुःख से कैसे भाहर निकले