पहली बात की समस्या कोई बड़ी हवा नहीं जिसका कोई समाधान नहीं दूसरी यह केवल हम ही समस्या में नहीं तीसरी यह की समस्या हमें रोक नहीं सकती हमारे जीवन की गति नहीं रोक सकती
इन सारी बातों को अपने मन में अच्छी तरह दृढ़ करके शुरुआत करें समाधान की ओर पहले तो समस्या को समस्या मानना छोड़ें क्योंकि समस्या वैसी नहीं होती जैसा कि हम सोचते हैं यह हमारी सोच होती है कि हम किसी परिस्थिति को समस्या मान लेते हैं हम जिसे समस्या कहते हैं उसी परिस्थिति के लिए कई लोग स्ट्रगल करते हैं
समस्या होती है कि हमारा व्यापार नहीं चल रहा है मगर यह सकारात्मक परिस्थिति तो हमारे पास है कि हमारे पास व्यापार है कोई दुकान या बिजनेस है मगर कई लोग ऐसे भी जिनके पास ना तो व्यापार है ना दुकान है उन लोगों के लिए व्यापार दुकान समस्या है व्यापार नहीं चल रहा व्यापार नहीं चल रही हमारी समस्याएं मगर हम उन लोगों से से कई गुना अच्छी स्थिति में है जिनके पास ना दुकान है ना बिजनेस है बस यहां हमें अपनी सोच बदलना है फिर देखो समस्या समस्या नहीं लगेगी
कई लोग अपने परिवारिक झगड़े से परेशान हैं मगर कई लोग हैं जो अपने परिवार नहीं होने से परेशान है हमें यह बात समझनी होगी परिवार है तो सब कुछ होगा कभी प्यार भी और कभी झगड़े भी यहां हमें यह बात समझनी होगी कि एक व्यक्ति की दूसरी व्यक्ति से सोच कभी नहीं मिलती कुछ न कुछ सामंजस्य बिठाना ही पड़ता है
नौकरी पाने के लिए परेशान है तो कोई नौकरी करते हुए परेशान है तो मुख्य कारण किसे माना जाए नौकरी ना मिल पाना परेशानी है कि नौकरी करते हुए हुए परेशानी है
आप किसी बाबा के पास चले जाओ समस्या तो नहीं मिटाएगा हां मगर कुछ उपाय जरूर बता देगा क्योंकि वह बाबा है कुछ न कुछ उपाय उन्हें बताना ही होगा नहीं तो बाबागिरी कैसे चलेगी आप किसी डॉक्टर के पास चले जाओ शारीरिक बीमारी लेकर वह भी कुछ ना कुछ मेडिसन जरूर लिखेगा मगर ग्यारंटी नहीं सारी बीमारी दूर होगी
आप की बीमारी दूर होगी मगर आपको अपनी बीमारी का सही कारण बताना होगा अगर पेट दर्द हो रहा है और आप कहो कि सर में दर्द है तो सारी मेडिसन व्यर्थ है उल्टा रिएक्शन होगा सच बात तो यह है कि व्यक्ति अपनी समस्या को नहीं जानता अपनी बीमारी को ही नहीं पहचानता और लगा रहता है अपनी समस्या को मिटाने के उपाय के लिए
सबसे पहले तो जरूर है आपकी समस्या को पहचानने की कि वाकई में समस्या है क्या हम जिसे समस्या मान रहे हैं वह समस्या है भी कि नहीं है या मात्रा हमारा कोई Brahm अब जरूरत है उस समस्या के मूल को जानने की क्योंकि बीमारी का इलाज तभी संभव है जब बीमारी की पहचान हो शायद इसीलिए आजकल कई लेबोट्री टेस्ट होते हैं
अगर शारीरिक बीमारी ठीक ना हो तो उसके लिए कई लेबोरेटरी टेस्ट होते हैं मगर मानसिक बीमारी मैं ऐसी कोई लेबोट्री नहीं जहां विचारों की जांच की जा सके ऐसा कोई एक्स-रे नहीं जा विचारों की टूट समस्या के मूल को देखा जा सके यहां हम खुद बीमार है और हमें खुद को ही डॉक्टर बनना होगा
मन के विभिन्न पहलू , मन के विकास से कैसे अपनी उन्नति करे l सुख - दुःख से कैसे भाहर निकले
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