आत्मगौरव को नष्ट करके जीना मर्त्यु से भी बुरा है अगर व्यक्ति ने अपने प्रति सम्मान ना हो ,आत्मगौरव न हो तो उसको कहीं भी शांति नहीं मिल सकती। आत्मगौरव मन का उत्साह है, आंतरिक शक्ति है जो व्यक्ति को पक, पक पर सहयोग करती है। अगर यह आत्म गौरव व्यक्ति से छीन लिया जाए तो उसका जीवन पथ पर उत्साह ,जोश के साथ चलना मुश्किल है। ।
व्यक्ति का आत्म गौरव उन कार्यों से मरता है जो गलत श्रेणी में आते हैं और जीसे करने से आत्मा मना करती है। अगर व्यक्ति वही कार्य करता है जिस कार्य के लिए उसकी आत्मा गवा नहीं देती तो एक आत्मग्लारनि महसूस होती है। अगर व्यक्ति द्वारा आत्मा के मना बोलने के बाद भी स्वार्थवश कोई काम करता है तो उसका आत्मसम्मान कम हो जाता हैं।
आत्मसम्मान मतलब अपने सव्य के प्रति सम्मान।
हर व्यक्ति यही चाहता है कि सभी लोग उसका सम्मान करें ,उसके कार्य की प्रसन्नसा करे मगर यह तभी संभव है ,जब हम सव्य अपना सम्मान करें। हमारे कार्य से दूसरे भी तभी पसंद होंगे जब सव्य अपने हर कार्य से प्रसन्न रहे , अपना हर कार्य बिना किसी दवंद के करे।
दूसरे लोग आपको आपके बड़े कार्य से सम्मान नहीं देते ,अपितु आपके कार्य करने के तरीके से सम्मान देते हैं। आपको सम्मान आपके महंगे कपड़ों से नही बल्कि आपके चेहरे की चमक , आपकी सादगी से देते हैं। आपके कार्य करने की सादगी ही सब को मोहित कर सकती है। आपके चेहरे पर दिखाई देने वाला सुकून आप की सबसे बड़ी दौलत है। यही सबसे बड़ा मोहित करने वाला राज है।
आत्मा की आवाज के विपरीत स्वार्थवस् किए जाने वाले कार्य से ऊपरी सुख सुविधा भले मिल जाए मगर अंत करण की शांति नहीं पा सकते। एक अशांति बनी रहती है उसकी आत्मा उसे बार-बार टोचति रहती है। आत्मग्लानि का भाव उसे बार-बार होता रहता है।
मृत्यु से व्यक्ति एक बार मरता है किंतु आत्मा को मारकर वह हर पर मरता है। आत्मा के बिना व्यक्ति का शरीर जिंदा रहता है जो पल-पल मरता है।
अतः सफल एवंम एक उत्सामय जीवन के लिए अपने आत्मगौरव को कभी मरने ना दे। सदा अपने आप के आत्मगौरव को बढ़ाने वाले कार्य करें। अपने आप से पूछें, मुझे यह कार्य क्यों करना है, मैं किस लिए कार्य करना चाहता हूं, क्या मैं अंदर से पूरी तरह से यह कार्य करने के लिए तैयार हु, अगर आवाज आय हा तो बेसक चलते रहे।
वैसे भी हम क्या चाहते है। खुसी, मन का सकून ही ना तो फिर इसके लिए क्या करना। भाहर देखेंगे तो केवल भरम ही पाएंगे, कि इसमें खुशी है, बस यह पाले, बस वह और मिल जाय। भाहरी साधनो से भी भोत खुसी मिलेगी बस नैतिकता के सात यह सब अर्जित की जाय।
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