!यह बात ध्यान रखें ना कल था, ना कल होगा जो भी है बस आज, अभी ही है!
अगर बीते कल को याद रखोगे तो पूर्व की बहुत सारी कमियां और कमजोरियों को अपने पास रखो गे अगर भविष्य पर नजर रखेंगे तो बहुत सारी आशाएं आकांक्षा है तुम्हें दबाकर रखेगी! इसलिए जरूरी अपने आप को पूरी तरह खाली कर दो ना अतीत की कोई याद ना भविष्य की कोई योजना बस आज और अभी मैं अपने आप को जीने दो फिर देखो तुम अपने आपको कितना हल्का ,कितना सुकून महसूस करते हो ना कोई पीठ पर अतीत की गठरी है न सर पर भविष्य का कोई भार
हम सफल होना चाहते हैं कुछ अच्छा करना चाहते हैं मगर अपने आप को बदलना नहीं चाहते अगर बदलाव लाना चाहते हैं तो पुराने को तो छोड़ना होगा! हर व्यक्ति चाहता है कि उसके मन सकारात्मक सोच वाला हो positive thinking मगर नकारात्मक सोच को अपने से हटाना भी नहीं चाहता !अगर नई मेमोरी चाहिए तो पुरानी मेमोरी को तो डिलीट करना ही होगा! क्योंकि मेमोरी की स्टोरेज लिमिटेड हे! वह हर वक्त वही दिखाएगी, हर काम में यही आवाज दिलाएगी !अगर नकारात्मक सोच से मन भरा है तो हर कार्य में पहले नकारात्मकता ही आवाज देगी, यह कार्य नहीं हो सकता ,इसमें कई अड़चनें हैं, इस काम के हम लायक नहीं! अगर सकारात्मक सोच से मन भरपूर होगा तो अंदर से आवाज आएगी यह कार्य कोई बड़ा नहीं इससे पहले भी हम कई कार्य कर चुके हैं और सफल हुए हैं यही होता है आत्मविश्वास
आत्मविश्वास और आत्मगिलानी
अगर किसी व्यक्ति ने 100 काम किए हैं और वह 40 में सफल हुआ और 60 में फेल !वह 40 सफलता से खुश हैं बहुत खुश है उसे 60 असफलता का कोई गम नहीं! ऐसा व्यक्ति सकारात्मक सोच वाला कहलाता है! उसने अपने मन में 60 असफलता नहीं 40 सफलता को जगह दी !वह अपनी 40 सफलताओं से सुखी ना की 60 असफलताओं से दुखी! इसी परिस्थिति में नकारात्मक मन 40 सफलताओं को छोड़ 60 असफलताओं को महत्व देता है! 40 सफलता को बाहर रख 60 असफलता को एक-एक कर अपने मैं संजोए रखता है
परिस्थिति एक ही है मगर दोनों व्यक्तियों का स्वभाव अलग-अलग दोनों ने वैसे ही सोचा जैसा उनका मन था
खाली गिलास को पानी से आधा भरा जाए और लोगों के एक समूह से पूछा जाए कि तुम्हें क्या दिखाई दे रहा है कुछ कहेंगे गिलास आधा खाली है तो कुछ कहेंगे कि गिलास आधा भरा हुआ है !सामने जो वस्तु परिस्थिति है एक ही है मगर जवाब अलग-अलग! जिसने आधा खाली देखा उसने आधा खाली गिलास क हां जिसने आधा भरा गिलास देखा उसने आधा भरा हुआ कहां
कहने का तात्पर्य यह है कि केवल अपनी सोच को बदलो अपने मन की सारी नकारात्मकता को मिटा दे! सकारात्मक सोच से अपने आप को भर दे! अगर अतीत की कोई नकारात्मकता मन में भरी हुई हे तो अतीत को पारदर्शी नजरों से देखें आप को वहां पर कई सारी सकारात्मकता मिल जाएगी! इस सकारात्मकता को अपने मन में अच्छी तरह से जगह दे सकारात्मकता का जितना पक्ष मजबूत रखेंगे नकारात्मक ना उतनी ही कमजोर होती जाएगी !दिन प्रतिदिन यह क्रम जारी रखें कोई कहे या ना कहे मगर अपने आप से जरूर कहें कि मैं एक सफल व्यक्ति हूं !महान इंसान हां! कभी किसी चीज से नहीं डरता! मैं हर कार्य में सफल होता हूं!
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