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उदास क्यों रहना

  उदासीनता मतलब आशा की कमी आत्मविश्वास का ना होन l
     इसके अतिरिक्त उदासीनता के िए किसी और चीज को दोष नहीं दे सकते l कोई भी परिस्थिति, वजह या व्यक्ति उदासीनता का कारण नहीं एक ही कारण हो सकता है कि हमने आत्मविश्वास को खो दिया या भविष्य पर विश्वास नहीं रखते अगर  भविष्य पर विश्वास रखा जाए तो कभी उदासीनता नहीं आएगी l एक विश्वास मन में होगा आज चाहे जैसी भी परिस्थिति है मगर आने वाला कल बहुत अच्छा होगा यह सोच तभी आएगी जब हम अपने आत्मविश्वास को बनाकर रखेंगे
        आत्मविश्वास और आशा दोनों एक दूसरे के पूरक है lअगर आत्मविश्वास भरपूर है तो भविष्य के प्रति आशाएं भी कई होगल l  जहां आत्मविश्वास कम होने लगता है तो भविष्य के प्रति आशाएं भी खत्म होने लगती है , और व्यक्ति उदासीनता के कोहरे  में  खोने लगता है
        अपने  आप  को  पहचाने आप उस  इस्वर  की   ऐक अमूल्य  कलाकृति   हो l आप में  भी  दूसरे  सफल  इंसानो  की तरह  ही  सर्वसक्ति  है अपितु  उनसे  कई   गुणाः  बढ़ कर l 
       Har इंसान  अपने में एक खूबी  लेकर  आता हैं i एक ऐसी  सकती  से  संपन्न  होता  है जो  किसी  दूसरे में नहीं  होती  जरुरत  होती है इसे   पहचानने   की l 
        दीन का कुछ  समय  अपनी  हॉबी  को भी दे l पहले  तो  अपनी हॉबी को पहचाने कि किस  चीज  में तुम्हारा  इंट्रेस्ट  हैं l  यह कार्य टाइमपास वाला नहीं बल्कि तुम्हारे  विशेष गुण को प्रदर्शित करने वाला होना चाहिए l   इस बात की फिक्र ना करें कि इस कार्य का क्या उद्देश्य होगा l यह कार्य भविष्य में फिर भी अच्छा फल ही देगा l साथ ही आप में एक आत्मविश्वास होगा कि मेरे में एक विशेष गुण है
     ईश्वर में विश्वास रखें l अध्यात्म से जुड़े रहे,  क्योंकि आध्यात्मिक व्यक्ति कभी उदास नहीं रहता उसे अपने आप पर या किसी और पर विश्वास हो या ना हो मगर ईश्वर पर विश्वास जरूर होता है  यह विश्वास ही उसे अंदर से कमजोर नहीं होने देता l ईश्वर मैं विश्वास  हो मगर अंधविश्वास नहीं होना चाहिए l विश्वास हमें शक् प्रदान करेगा र अंधविश्वादुख प्रदान करेगा  l ईश्वर पर विश्वास होना चाहिए कि, वह हमारे साथ कभी गलत नहीं होने देंगा ना कि इस तरह का अंधविश्वासि िक ईश्वर ही हमारे लिए सब कुछ करेगा ,कोई चमत्कार करेगा  l यह विश्वास हम सिर्फ सोचकर ही अपने मन में नहीं डाल सकते l ऊपरी तौर पर मान लेने से कि हम आध्यात्मिक हैं तो सिर्फ हम अपने आपको धोखा ही देंगे l  जब तक हमारा मन शांत नहीं होगा,  विचार नेक नहीं होंगे, हम  आध्यात्मिक नहीं हो सकते l मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारा  या चर्च हम किसी भी धर्म के हो  वहां जाकर तब तक शांति नहीं पा सकते जब  तक मन साफ  न हो l
         संस्कृत में 1 श्लोक है अप्पो दीपो भवः अर्थात अपने दीपक खुद बनो, अपने आप को सही प्रकाश दिखाओ ,  सवय ही अपनेआप को सही रास्ता दिखाओ l  किसी और पर भरोसा करने की अपेक्षा  अपने आपसे पूछो मुझे क्या करना चाहिए ,किस राह पर चलना चाहिए, क्या सही है और क्या  गलत है यह दूसरों की अपेक्षा तुम ज्यादा अच्छी तरह से समझते हो जब चलना तुम्हें ,करना तुम्हें ,पाना  तुम्हें है, तो फिर  दुसरो  पर  पूरा  भरोसा  केसा  करना 

                       दोस्तों  कमेंट्स  जरूर  करना  अगर कुछ सवाल  हो तो जरूर सैर  करना हमारी  कोसिस  रहेगी  आपको  सही  राह दिखने  की  

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